गोरखपुर उपचुनाव में बीजेपी पूरी ताकत से मैदान में उतरी है. योगी आदित्यनाथ ने प्रचार की कमान सँभालते हुए ताबड़तोड़ जनसभाओं के जरिये विपक्षी दलों पर हमले की योजना बनाई है तो वहीँ प्रमुख विपक्षी दल सपा अब बसपा के साथ मिलकर बीजेपी को उसके गढ़ में मात देने का सुनहरा सपना भी देख रही है. बसपा ने जैसे ही सपा को समर्थन देने का ऐलान किया वैसे ही यूपी की राजनीति में 22 साल पूरा घटनाक्रम सभी के जेहन में तैरने लगा जब कांशीराम और मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन कर चुनाव लगा था. हालाँकि ये उपचुनाव है लेकिन इसके कई मायने हैं.

बसपा का राज्यसभा जाना:

बसपा एकमात्र सीट की तलाश में है और ये तभी संभव है जब सपा और कांग्रेस के वोट उसे मिल जाएँ. राज्‍यसभा की एक सीट जीतने के लिए 36.36 वोट चाहिए. समाजवादी पार्टी के पास 47 वोट हैं. यानी सपा के पास जीत से 10.64 वोट ज्‍यादा हैं जबकि बीएसपी के पास 19 वोट हैं, यानी जीत से 17.36 वोट कम. तय डील के अनुसार, समाजवादी पार्टी बीएसपी को 10.64 वोट देगी और कांग्रेस को पास 7 हैं. बीजेपी के खिलाफ ये तीनों दल एक होकर बसपा को एक सीट दिलाने का काम कर सकते हैं. बदले में वो समाजवादी पार्टी के विधान परिषद उम्‍मीदवार को वोट करेगी.

उपचुनाव में सपा जीत की उम्मीद में:

बसपा का समर्थन मिलने के बाद अब समाजवादी पार्टी फूलपुर और गोरखपुर में जीत का ख्वाब देख रही है. अगर ये डील यहाँ सफल साबित हुई तो इसके दूरगामी परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं और बसपा-सपा कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन कर बीजेपी के खिलाफ चुनाव के मैदान में उतर सकती हैं. यूपी की सियासत ने जिस प्रकार तेवर बदले हैं, हर कोई हैरान है कि ये अचानक कैसे हो गया क्योंकि कई बार अखिलेश यादव के प्रस्ताव को मायावती ने पहले ठुकरा दिया था.

मायावती ने की पहल और सपा को समर्थन देने का किया ऐलान:

इसके पहले लगातार अखिलेश यादव कहते रहे कि बुआ का साथ मिले तो बीजेपी को हराया जा सकता है तो वहीँ अब मायावती ने भी अखिलेश यादव के सुर में सुर मिलाते हुए उपचुनाव में समर्थन देने की बात खुले मंच से की और इसके बदले राज्यसभा चुनाव में सपा का साथ माँगा. दोनों दलों की ये डील बीजेपी को कितना नुकसान पहुंचाएगी ये तो अब वक्त ही बताएगा.

कहाँ हैं कांग्रेस:

इन दो दलों के साथ आने के बाद देखा जाये तो कांग्रेस के पास कोई खास विकल्प नहीं बचता है. कांग्रेस यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी है लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं. हालाँकि कई राजनीतिक विश्लेषक ये मानते हैं कि कांग्रेस इन दोनों दलों के साथ मिलकर महागठबंधन की स्वरुप को साकार कर सकते हैं और इस स्थिति में बीजेपी के लिए 2019 में बड़ी और मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं.

राज्यसभा: ये है बसपा का 1 सीट जीतने का समीकरण

बीजेपी के खिलाफ सपा और बसपा का गठबंधन

उपचुनाव को लेकर एसपी और बीएसपी के हाथ मिलाने की खबर जैसे ही खास से आम हुई वैसे ही बीजेपी हरकत में आ गई. बीजेपी त्रिपुरा में मिली ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रही थी तो वहीँ बसपा और सपा गोरखपुर में बीजेपी को मात देने के लिए एक साथ आने का ऐलान कर रही थी. इस गठबंधन की हवा निकालने की कमान खुद योगी आदित्यनाथ थामते नजर आये. योगी आदित्यनाथ ने तंज कसा और कहा- केर बेर का साथ कैसा? 

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