प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 31 दिसम्बर 2016 को जिस जननी सुरक्षा योजना के तहत मातृत्व लाभ 6000/रु. दिए जाने की घोषणा की थी। इस योजना का पूरा लाभ प्रसूताओं तक नहीं पहुंच रहा है और रास्ते में ही घूसखोर अधिकारी बंदरबांट कर ले रहे हैं।

  • यह हम नहीं बल्कि एक पीड़िता के खाते में आई धनराशि खुद हकीकत बता रही है।
  • पीड़िता का आरोप है कि इन एक हजार रुपये के लिए भी अधिकारी घूस मांगते रहे हैं।
  • आरोप यह भी है कि इस योजना में लाभ पाने वाली हजारों महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है और वह यह रकम लेने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं।
  • आरोप है कि प्रसूताओं को मिलने वाली धनराशि का 5 हजार रुपये बीच में घूसखोर अधिकारी बंदरबांट करके खा जा रहे हैं।

पैसे निकलवाने के लिए खर्चा मांग रहे जिम्मेदार

  • राजधानी के 1/1011 रतन खंड में रहने वाली कविता तिवारी ने बताया कि मेरी डिलेवरी लोकबन्धु अस्पताल लखनऊ में 27 जनवरी 2017 को हुई थी।
  • जननी सुरक्षा योजना का लाभ पाने के लिए उन्होंने सारे दस्तावेज अस्पताल में जमा किये थे।
  • आरोप है कि विभाग में इस योजना के लाभ के लिए राज कुमार (क्लर्क) द्वारा मुझसे खर्चा मांगा गया। पीड़िता ने इसका विरोध किया।
  • इसकी पीड़िता ने शिकायत चिकित्सा अधिकारी अमिता यादव से की तो उन्होंने कहा कि मैं इसकी जांच करवाती हूं।

तीन माह बाद खाते में आये सिर्फ एक हजार

  • पीड़िता ने बताया कि डिलीवरी के करीब 3 महीने बाद मेरे खाते में 6000/रु. की जगह सिर्फ 1000/रु आया है।
  • महिला का कहना है कि मेरे जैसे ना जाने कितनी महिला जननी योजना का लाभ पाने के लिए अस्पताल के चकर रोजाना कटती हैं और लाभ पाने के लिए इस क्लर्क को घूस देना पड़ता है।
  • पीड़िताओं का आरोप है कि क्या पीएम ने चुनाव में वोट लेने के लिए जननी सुरक्षा के तहत मातृत्व लाभ 6000/रु. दिए जाने की घोषणा की थी।
  • क्या ये एक चुनावी जुमला था या वोट की राजनीती थी।
  • पीएम ने जो कहा था वह नहीं हुआ चुनाव समाप्त होते ही क्या योजना समाप्त हो गई।
  • महिला का कहना है कि हम जैसी देश की करोड़ों महिला को वोट की राजनीती के लिए सरकारी योजनाओ का लालच देकर सिर्फ और सिर्फ शोषण का शिकार क्यों बनाया जाता है।
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