केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने महात्मा गांधी की हत्या से संबधित नाथूराम गोडसे के बयान समेत अन्य जुड़े दस्तावेज को राष्ट्रीय अभिलेखागार की वेबसाइट पर तत्काल सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु के अनुसार, भले ही कोई नाथूराम गोडसे और उनके सह-आरोपी से वास्ता ना रखता हो लेकिन हम उनके विचारों का खुलासा करने से मनाही नहीं कर सकते।
याचिकाकर्ता पहुंचा केन्द्रीय सूचना आयोग:
- याचिकाकर्ता आशुतोष बादल ने पहले गोडसे से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस से मांगी है।
- हत्याकांड से जुड़े आरोप पत्र और गोडसे के बयान सहित अन्य जानकारी मांगी है।
- दिल्ली पुलिस ने आशुतोष के आवेदन को राष्ट्रीय अभिलेखागार के पास भेजते हुए कहा था कि रिकॉर्ड उन्हें सौंप दिया गया है।
- इसके बाद ने बंसल से कहा कि वह रिकॉर्ड देखकर स्वयं सूचनाएं हासिल कर लें।
- बंसल इस विषय मे पर्याप्त सूचना पाने में असफल होने के बाद केन्द्रीय सूचना आयोग पहुंचे हैं।
- इस मामले में आचार्युलु ने राष्ट्रीय अभिलेखागार के केंद्रीय जन सूचना आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह फोटो प्रति के लिए तीन रुपये प्रति पेज फीस न लें।
इस मामले में सेक्शन 8(1)(a) लागू नहीं होता:
- इस मामले में राष्ट्रीय अभिलेखागार और दिल्ली पुलिस ने सूचना को सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं जताई है।
- श्रीधर आचार्युलु ने के अनुसार मांगी गई सूचना के लिए किसी छूट की जरूरत नहीं है।
- आगे सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना 20 वर्ष से ज्यादा पुरानी हो चुकी है।
- इसलिए ऐसी स्थिति में यदि वह आरटीआई कानून के प्रावधान 8(1)(a) के तहत नहीं आता तो उसे गोपनीय नहीं रखा जा सकता।
- इस धारा के तहत देश की सुरक्षा संबंधित या दूसरे देशों से रिश्तों को प्रभावित करने वाली सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकती हैं।
- आचार्युलु के अनुसार इस मामले में सेक्शन 8(1)(a) लागू नहीं होता क्योंकि गोडसे के बयान से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच शत्रुता नहीं फैलेगी।
- सूचना आयुक्त ने कहा कि गांधी का जीवन, चरित्र और शांति दूत, स्वतंत्रता संग्राम व हिंदू-मुस्लिम एकता के महानायक हैं।
- कहा उनकी छवि शारीरिक रूप से उन्हें मिटाने या उनकी नीतियों के खिलाफ सैकड़ों पेज लिखने के बाद भी नहीं मिट सकती।
- आपको बता दें कि दक्षिणपंथी कार्यकर्ता गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी।
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