उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं, साथ ही सूबे का नया मुख्यमंत्री भी योगी आदित्यनाथ को चुन लिया गया है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के तहत समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने गठबंधन किया था।
गठबंधन की घुट्टी गले नहीं उतरी:
- यूपी विधानसभा चुनाव के परिणाम से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री भी घोषित हो चुके हैं।
- जिसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने सूबे में 14 साल बाद वापसी की है।
- ज्ञात हो कि, यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को 325 सीटों का भारी बहुमत प्राप्त हुआ है।
- वहीँ यूपी चुनाव के तहत सपा-कांग्रेस में हुए गठबंधन की पूरी तरह से हवा भी निकल गयी।
- सपा-कांग्रेस गठबंधन को सूबे की जनता ने सिरे से नकार दिया है।
सपा का प्रदर्शन औसत:
- यूपी विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस का संयुक्त प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।
- गठबंधन को 403 में से मात्र 54 सीटें ही मिली।
- साथ ही समाजवादी पार्टी का व्यक्तिगत प्रदर्शन को औसत कहा जा सकता है।
- सपा को 403 में से व्यक्तिगत तौर पर 47 सीटें मिलीं।
- कांग्रेस को साल 2012 में 28 सीटें मिली थीं।
- वहीँ 2017 में कांग्रेस को व्यक्तिगत तौर पर सिर्फ 7 सीटें ही मिली।
यूपी को ये साथ पसंद है:
- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने गठबंधन से पहले ’27 साल यूपी बेहाल’ कहा था।
- गठबंधन के बाद सपा-कांग्रेस मिलकर नया नारा खोज निकाला था।
- जिसमें कहा गया था कि, यूपी को ये साथ पसंद है।
- ज्ञात हो कि, अखिलेश समेत राहुल ने इस गठबंधन को दो युवा नेताओं का गठबंधन बताया था।
- जिसके ऊपर आधारित यह नारा बनाया गया था।
- लेकिन परिणामों पर गौर करें तो ये नारा भी पूरी तरह से फ्लॉप निकला है।
कांग्रेस में से यूपी को बस ‘ये’ सात पसंद हैं:
- सपा-कांग्रेस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए यूपी को ये साथ पसंद है का नारा दिया था।
- लेकिन चुनाव परिणाम देखें तो पाएंगे की उत्तर प्रदेश को कांग्रेस के बस ‘ये सात’ ही पसंद हैं।
- राकेश सिंह
- अदिति सिंह
- आराधना मिश्र ‘मोना’
- नरेश सैनी
- मसूद अख्तर
- अजय कुमार ‘लल्लू’
- सोहिल अख्तर अंसारी
कांग्रेस को पुनर्विचार या पुनर्जागरण की जरुरत:
- यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
- जिसके बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी को लोकतंत्र में सड़ रही अपनी जड़ों को अलग करने की जरुरत है।
- साथ ही कांग्रेस को अब बड़े पैमाने पर अपने स्वमूल्यांकन की जरुरत है।
- पार्टी किसी भी चुनाव में अब सत्ता के लिए नहीं बल्कि अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती नजर आती है।
- अब तो कांग्रेस को सिर्फ और सिर्फ पुनर्जागरण या स्थिति पर पुनर्विचार ही बचा सकती है।
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Sudhir Kumar
I am currently working as State Crime Reporter @uttarpradesh.org. I am an avid reader and always wants to learn new things and techniques. I associated with the print, electronic media and digital media for many years.