प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सहित काशी के सभी जिलों में बीजेपी ने इस बार होली केसरिया रंग के साथ ही खेलने का फैसला लिया है।
वाराणसी :-
- होली के त्योहार के बहाने जनता पर भगवा की छाप के साथ देशभक्ति का रंग भी छोड़ा जाए।
- इस फैसले के पीछे जेएनयू में आतंकी अफजल की याद राष्ट्रविरोधी नारे लगने के बाद देश में बने माहौल को केसरिया रंग में होली खेलकर नया कलेवर देने का है।
- होली को केसरिया रंग में रंगने के लिए बीजेपी काशी प्रांत के संगठन मंत्री चंद्रशेखर ने बैठक करने का निर्देश दिया गया है
- पंद्रह मार्च तक सभी जिलों में पदाधिकारियों से गांवों में रात्रि विश्राम के साथ चौपाल लगाने का भी निर्देश दिया है।
- चौपाल के बहाने देश में केंद्र सरकार की जनपयोगी योजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा।
- इसके साथ होली को केसरिया रंग में खेलने का भी मंत्र दिया जाएगा।
- इस बार बनारस में केसरिया रंग छायेगा और पूरे काशी को भगवा रंग में रंग देगा।
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- वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है।
- यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
- रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है।
- यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है।
- यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं.
- वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।
- पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं।
- दूसरे दिन, जिसे प्रमुखतः धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन इसके अन्य नाम हैं.
- लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं
- घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है।
- होली के त्योहार के बहाने जनता पर भगवा की छाप के साथ देशभक्ति का रंग छोड़ने का भी प्रयास है।
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Ashutosh Srivastava
Reporter at uttarpradesh.org, News Junkie,Encourager not a Critique Admirer of Nature.