राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के सरकारी दावे की पोल खुली है। शहर के चिनहट थाना क्षेत्र में कई बार फोन मिलाने के बावजूद जब गर्भवती को एंबुलेंस नहीं मिली तो परिवारीजनों से ई-रिक्शा से अस्पताल ले जा रहे थे तभी रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया। इस घटना ने सरकारी दावों की पोल खोल कर रख दी है।
कई बार फोन मिलाया फिर लेकिन नहीं मिली मदद
- जानकारी के मुताबिक, चिनहट की गर्भवती सादिया (28) को गुरुवार सुबह 9:45 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई।
- इस पर परिवारीजनों ने एंबुलेंस नंबर 102 डायल किया।
- फोन करने पर एंबुलेंस के इंतजार करने की बात कही गई।
- करीब 1 घंटे तक परिवारीजन बार-बार 102 एंबुलेंस को फोन लगाते रहे लेकिन वह नहीं आई।
- इधर गर्भवती की हालत बिगड़ने पर परिवारीजन ई-रिक्शा से लोहिया अस्पताल ले जा रहे थे तभी रास्ते में प्रसव हो गया।
- अस्पताल पहुंचने पर तुरंत जच्चा और बच्चा को भर्ती कर लिया गया।
- इस संबंध में नेशनल एंबुलेंस सेवा के प्रवक्ता अजय यादव का कहना है कि चिनहट जैसे इलाके में 1 घंटे तक एंबुलेंस ना मिलना संभव नहीं है। एंबुलेंस समय पर क्यों नहीं पहुंच इसकी जांच की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
- महिला के पति हकीमुद्दीन ने बताया कि वो दुकानों पर ब्रेड, बिस्कुट और नमकीन की सप्लाई करता है।
- उसकी कोई फिक्स वेतन नहीं है।
- उसकी पहले से तीन बेटियां है।
- बड़ी बेटी एलिमा (9), दूसरी बेटी इकरा(6) और सबसे छोटी बेटी जिकरा (3) है।
- घर में कोई बेटा नहीं था।
- दोनों एक बेटा चाहते थे।
- उसकी पत्नी ने बेटे को जन्म दिया।
- यह बच्चा उन दोनों का चौथी संतान है।
- हकीमुद्दीन ने बताया जब वे किसी तरह पेशेंट को ई-रिक्शे से लेकर हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां पर कोई भी नर्स या महिला कर्मचारी उसे स्ट्रेचर से अंदर ले जाने के लिए नहीं आई।
- वह स्ट्रेचर के लिए इधर-उधर भगते रहे।
- थोड़ी देर बाद उनकी नजर एक स्ट्रेचर पर पड़ी।
- उसके बाद वे दौड़कर स्ट्रेचर खींच कर लेकर आए।
- उसके बाद खुद ही स्ट्रेचर खींचते हुए हॉस्पिटल की इमरजेंसी के अंदर ले गए।
- तब जाकर डॉक्टर्स ने उसे बच्चे को देखा।
जच्चा बच्चा के लिए ये हैं सुविधाएं
- गर्भवती को निशुल्क इलाज के लिए घर से अस्पताल ले जाना।
- प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल से घर पहुंचाना।
- गर्भवती व शिशु को बेहतर इलाज के लिए एक से दूसरे अस्पताल छोड़ना।
- 1 साल तक के शिशु को बीमार होने पर घर से अस्पताल ले जाना और छोड़ना।
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Sudhir Kumar
I am currently working as State Crime Reporter @uttarpradesh.org. I am an avid reader and always wants to learn new things and techniques. I associated with the print, electronic media and digital media for many years.